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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

खजुराहो के मंदिर: सिर्फ मूर्तियां नहीं, पत्थर पर लिखी कविता (MPPSC & History Facts)



 प्रस्तावना (Introduction):

जब भी भारतीय वास्तुकला की बात होती है, तो खजुराहो (Khajuraho) का नाम सबसे ऊपर आता है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित ये मंदिर दुनिया भर में अपनी अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला के लिए मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खजुराहो का इतिहास सिर्फ मूर्तियों तक सीमित नहीं है?

आज के इस ब्लॉग में हम खजुराहो के उन तथ्यों को जानेंगे जो MPPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

1. इतिहास और निर्माण (History & Builders)

खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश (Chandela Dynasty) के राजाओं ने 950 ई. से 1050 ई. के बीच करवाया था।

प्राचीन काल में इसे 'खजूरपुरा' या 'खजूरवाहिका' कहा जाता था।

यहाँ कुल 85 मंदिर बनवाए गए थे, जिनमें से अब केवल 25 मंदिर ही शेष बचे हैं।

2. वास्तुकला की शैली (Architecture Style)




ये मंदिर 'नागर शैली' (Nagara Style) का बेहतरीन उदाहरण हैं।

पंचायतन शैली: यहाँ के मुख्य मंदिर पंचायतन शैली में बने हैं (एक मुख्य मंदिर और चार छोटे मंदिर कोनों पर)।

निर्माण सामग्री: इन मंदिरों को बलुआ पत्थर (Sandstone) और ग्रेनाइट से बनाया गया है। पत्थरों को जोड़ने के लिए चूने का नहीं, बल्कि 'इंटरलॉकिंग सिस्टम' का उपयोग हुआ है।



3. कामुक मूर्तियां: सच और मिथक (The Erotic Sculptures)

अक्सर लोग खजुराहो को सिर्फ कामुक मूर्तियों (Erotic Art) के लिए जानते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मंदिर की दीवारों पर सिर्फ 10% मूर्तियां ही कामुक हैं।

बाकी 90% मूर्तियां आम जीवन, संगीत, युद्ध, देवी-देवताओं और पशु-पक्षियों को दर्शाती हैं।

यह दर्शाता है कि काम (Sex) जीवन का सिर्फ एक हिस्सा है, सम्पूर्ण जीवन नहीं।



4. खजुराहो के प्रमुख मंदिर (Exam Special)

MPPSC के लिए ये 3 मंदिर सबसे ज़रूरी हैं:

कंदरिया महादेव मंदिर: यह खजुराहो का सबसे बड़ा और सुंदर मंदिर है। इसका निर्माण चंदेल राजा विद्याधर ने करवाया था। इसकी तुलना भगवान शिव के कैलाश पर्वत से की जाती है।

चौसठ योगिनी मंदिर: यह यहाँ का सबसे पुराना मंदिर है जो ग्रेनाइट से बना है।

चित्रगुप्त मंदिर: यह एकमात्र सूर्य मंदिर है जहाँ भगवान सूर्य सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं।

5. यूनेस्को (UNESCO) का दर्जा

इन मंदिरों की भव्यता को देखते हुए 1986 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया। यह मध्य प्रदेश का पहला स्थल था जिसे यह दर्जा मिला।

निष्कर्ष:

खजुराहो सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली संस्कृति का प्रमाण है। अगर आप इतिहास प्रेमी हैं या MPPSC की तैयारी कर रहे हैं, तो इन तथ्यों को ज़रूर याद रखें।

सवाल: क्या आप बता सकते हैं कि खजुराहो के मंदिर किस धर्म से संबंधित हैं? (उत्तर: हिंदू और जैन धर्म)।

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