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शनिवार, 24 जनवरी 2026

MPPSC Notes: मध्य प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास | प्रमुख राजपूत राजवंश और सल्तनत (Part-2)

 नमस्ते दोस्तों! अगर आपने मध्य प्रदेश के प्राचीन इतिहास के नोट्स अभी तक नहीं पढ़े हैं, तो पहले उन्हें ज़रूर पढ़ें:

👉 [भाग 1: मध्य प्रदेश का प्राचीन इतिहास (Ancient History of MP)]-

 https://aspiranthindiguide.blogspot.com/2026/01/mppsc-prelimsmppsc-notes-part-1.html

अब हम मध्य प्रदेश के मध्यकालीन इतिहास की ओर बढ़ते हैं, जहाँ हमने कई शक्तिशाली राजपूत राजवंशों और मुस्लिम सल्तनतों का उदय देखा। यह वह दौर था जब कला, स्थापत्य और शौर्य अपने चरम पर था।

 प्रमुख राजपूत राजवंश: शौर्य और कला का संगम

राजवंश संस्थापक राजधानी प्रमुख शासक और उपलब्धि

1. चंदेल वंश 

               संस्थापक - नन्नुक (831 ई.) 

               राजधानी - खजुराहो / महोबा

               प्रमुख शासक -  विद्याधर: एकमात्र हिंदू शासक जिसने महमूद गजनवी को हराया। इन्होंने खजुराहो के विश्व                                                            प्रसिद्ध मंदिरों (जैसे कंदरिया महादेव) का निर्माण कराया।

2. परमार वंश 

                संस्थापक - उपेंद्र राज 

                राजधानी - धार (मालवा) 

                प्रमुख शासक - राजा भोज: महान विद्वान, कवि और निर्माता। इन्होंने भोपाल ताल, धार की भोजशाला (सरस्वती                                                        मंदिर) और भोजपुर मंदिर का निर्माण कराया। इन्हें 'कविराज' की उपाधि मिली थी।

3. कलचुरी वंश 

                संस्थापक -  कोक्कल प्रथम 

                राजधानी - त्रिपुरी (जबलपुर) 

                प्रमुख शासक - गांगेयदेव: इन्होंने 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की। लक्ष्मीकर्ण: इन्हें 'हिंद का नेपोलियन'                                                               कहा जाता था।

4. कच्छपघात वंश 

                 संस्थापक - वज्रदामन 

                 राजधानी -  ग्वालियर

                 प्रमुख शासक -  इन्होंने ग्वालियर किले में प्रसिद्ध सास-बहू मंदिर (सहस्रबाहु मंदिर) का निर्माण कराया।

5. तोमर वंश  

                 संस्थापक - वीरसिंह देव

                 राजधानी. -  ग्वालियर 


यहाँ देखें खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर की भव्यता, जो चंदेल वंश की देन है:


2. मालवा सल्तनत और गोंडवाना का उदय

मालवा सल्तनत:

दिलावर खान गौरी: 1401 में मालवा को दिल्ली सल्तनत से स्वतंत्र घोषित किया।

होशंग शाह: इसने अपनी राजधानी धार से मांडू स्थानांतरित की। मांडू को 'शादियाबाद' (City of Joy) कहा जाता है।

मांडू के महल: जहाज महल, हिंडोला महल, रूपमती मंडप यहीं स्थित हैं, जो प्रेम और वास्तुकला के प्रतीक हैं।

गोंडवाना साम्राज्य (गढ़ा-कटंगा):

           संस्थापक: यादव राव।

           महारानी दुर्गावती: यह इस वंश की सबसे महान वीरांगना थीं। इन्होंने 1564 में मुगल सेनापति आसफ खान से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। उनकी समाधि बरेला (जबलपुर) में है।

मांडू के प्रसिद्ध जहाज महल का विहंगम दृश्य:






3. प्रमुख किले और स्थापत्य कला

ग्वालियर का किला( ग्वालियर) - सूरज सेन { 'जिब्राल्टर ऑफ इंडिया', 'किलों का रत्न'}

असीरगढ़ का किला (बुरहानपुर) -  आशा अहीर {'दक्षिण का प्रवेश द्वार'}

चंदेरी का किला (अशोकनगर) - कीर्तिपाल { जौहर कुंड के लिए प्रसिद्ध}

मदन महल किला (जबलपुर) -  राजा मदन शाह गोंडवाना



ग्वालियर किले का एक शानदार दृश्य, जो मध्यकाल की वास्तुकला का प्रतीक है:


गुरु मंत्र (Aspirants' Focus):

राजधानियां और परिवर्तन: किस शासक ने कब और कहाँ राजधानी बदली, इस पर विशेष ध्यान दें (जैसे धार से मांडू)।

उपाधियां: 'कविराज' (राजा भोज) और 'हिंद का नेपोलियन' (लक्ष्मीकर्ण) जैसी उपाधियां सीधे प्रीलिम्स में पूछी जाती हैं।

महिला शासक: रानी दुर्गावती से संबंधित प्रश्न मेन्स में भी आते हैं। उनकी वीरगाथा और उनके संघर्ष को अच्छे से समझें।

निष्कर्ष:

"मध्यकाल का हर पत्थर एक कहानी कहता है। इस कहानी को सिर्फ पढ़ो नहीं, इसे समझो और अपनी तैयारी में जी जान लगा दो!"

अगले भाग के लिए यहाँ क्लिक करें:

नोट: "दोस्तों, मध्यकालीन इतिहास के बाद मध्य प्रदेश का आधुनिक इतिहास (Modern History) और भी महत्वपूर्ण है, जहाँ हम 1857 की क्रांति के नायकों और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में जानेंगे। आधुनिक इतिहास की विस्तृत चर्चा हमने अगले ब्लॉग पोस्ट में की है।"

👉 [यहाँ क्लिक करें: मध्य प्रदेश का आधुनिक इतिहास - Part 3] ()




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